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✍️राना बेनी माधव सिंह समिति शंकरपुर के संस्थापक अध्यक्ष हरिचंद्र बहादुर सिंह के नेतृत्व में आयोजित हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम

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✍️राना बेनी माधव सिंह समिति शंकरपुर के संस्थापक अध्यक्ष हरिचंद्र बहादुर सिंह के नेतृत्व में आयोजित हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम

1857 की क्रांति में अवध की धरती से अंग्रेजी सत्ता को मिली थी सबसे बड़ी चुनौती

1857 की क्रांति के सम्राट थे राना बेनी माधव बक्श सिंह

शंकरपुर में अमर स्वतंत्रता सेनानी राना बेनी माधव सिंह को श्रद्धांजलि

क्रॉसर…… राना को ‘अवध की क्रांति का पुष्प’ बताते हुए उनके शौर्य को दी थी ऐतिहासिक पहचान

रायबरेली में अंग्रेजों के खिलाफ संगठित विद्रोह के प्रमुख सूत्रधार थे राणा बेनी माधव सिंह

क्रॉसर….राना पार्क में अश्वारूढ़ प्रतिमा पर पुष्पांजलि, दीप व मोमबत्ती जलाकर दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

जिले के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों से होकर शंकरपुर पहुंचा श्रद्धांजलि काफिला✍️

 

👉जगतपुर, रायबरेली👈

✍️भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में वर्ष 1857 की क्रांति सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक अध्याय मानी जाती है, जिसने देशभर में आज़ादी की अलख जगाई। इस ऐतिहासिक आंदोलन का केंद्र अवध रहा, जहां अंग्रेजी सत्ता को सीधी चुनौती देने वाले महान योद्धाओं में अमर स्वतंत्रता सेनानी राना बेनी माधव बक्श सिंह का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। प्रख्यात लेखक अमृतलाल नागर ने राणा को “अवध की क्रांति का पुष्प” कहकर उनके अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया है।वर्ष 1856 में अंग्रेजों द्वारा अवध के नवाब वाजिद अली शाह को पदच्युत किए जाने का सबसे मुखर और संगठित विरोध राना बेनी माधव सिंह ने किया। ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा स्थापित रायबरेली के सलोन जिला मुख्यालय में हुआ विद्रोह राणा की संगठन क्षमता और दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम था। उनकी रणनीति इतनी सशक्त थी कि 1857 की क्रांति से पूर्व ही पूरे रायबरेली जनपद में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह भड़क उठा। कंपनी के मेजर गाल की हत्या, न्यायालय पर हमला कर उसे आग के हवाले करना तथा गुरिल्ला युद्ध शैली अपनाकर अंग्रेजी हुकूमत को हिला देना राना बेनी माधव सिंह की वीरता और साहसिक नेतृत्व का प्रतीक है। उनकी शौर्यगाथाएं आज भी रायबरेली के गांव-गांव में लोकगीतों और कहावतों के रूप में जीवित हैं,

“खूब लड़ा मर्दाना, वह तो शंकरपुर का राना था।”

जगतपुर क्षेत्र के शंकरपुर और उड़वा गांव वीरता, बलिदान और राष्ट्रभक्ति की अमर गाथाओं के सजीव साक्ष्य हैं। यही कारण है कि इस अंचल के युवाओं में आज भी सेना और पुलिस सेवा के प्रति विशेष रुझान देखने को मिलता है। राना बेनी माधव सिंह की कुलदेवी आदि शक्ति जगतजननी मां दुर्गा का विशाल मंदिर भी इसी क्षेत्र में स्थित है, जिसका भव्य विस्तार एवं सौंदर्यीकरण कार्य समिति द्वारा शासन के संज्ञान में लाए जाने के बाद तीव्र गति से अग्रसर है।बुधवार को वीर अमर शहीद राना बेनी माधव बक्श सिंह को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के उत्तराधिकारियों, समिति पदाधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों द्वारा श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। इस अवसर पर इंटर कॉलेज शंकरपुर के प्रधानाचार्य लेफ्टिनेंट सत्येंद्र कुमार सहित अनेक सम्मानित लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंतर्गत 7 जनवरी को मुंशीगंज में अंग्रेजों द्वारा किसानों पर की गई बर्बर गोलीबारी की घटना को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि दिवस मनाया गया। इसके उपरांत श्रद्धांजलि काफिला जिले के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों—लालगंज, ऊंचाहार एवं अन्य तहसीली क्षेत्रों से होते हुए शंकरपुर पहुंचा।14 जनवरी को इंटर कॉलेज शंकरपुर के सामने स्थित राना पार्क में अश्वारूढ़ राना बेनी माधव बक्श सिंह की भव्य प्रतिमा पर फूल-मालाएं अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। कॉलेज परिसर में स्थित स्मारक पर दीप व मोमबत्ती प्रज्वलित की गई।इस अवसर पर कॉलेज प्रबंधक एवं राना बेनी माधव सिंह समिति शंकरपुर के संस्थापक अध्यक्ष हरिचंद्र बहादुर सिंह, समिति के पदाधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने भी अमर शहीद की विशालकाय अश्वारोही प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।वक्ताओं ने कहा कि राणा बेनी माधव सिंह केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, त्याग और बलिदान की ऐसी अमर प्रेरणा हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव देशसेवा के लिए प्रेरित करती रहेंगी✍️

✍️पत्रकार रितिक तिवारी की रिपोर्ट ✍️


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