✍️प्रजापिता पिताश्री के दिव्य विचार आज भी जीवन-मुक्ति की प्रेरणा देते हैं : ब्रह्मकुमारी ज्योति दीदी✍️

✍️प्रजापिता पिताश्री के दिव्य विचार आज भी जीवन-मुक्ति की प्रेरणा देते हैं : ब्रह्मकुमारी ज्योति दीदी✍️
57वें स्मृति दिवस पर भाग्य भवन में आयोजित हुआ आत्मिक स्मृति समारोह
जिले भर से पहुंचे साधकों ने ‘याद की यात्रा’ और पवित्र जीवन का लिया संकल्प,
तपस्या और सेवा में अग्रणी भाई-बहनों को किया गया सम्मानित
रायबरेली
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के भाग्य भवन, सुभाष नगर में प्रजापिता पिताश्री के 57वें स्मृति दिवस के अवसर पर एक प्रेरक आध्यात्मिक स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ब्रह्मकुमारी ज्योति दीदी ने कहा कि प्रजापिता पिताश्री के दिव्य विचार आज भी मानवता को जीवन-मुक्ति, आत्मिक उत्थान और श्रेष्ठ नैतिक मूल्यों की दिशा प्रदान कर रहे हैं।ब्रह्मकुमारी ज्योति दीदी ने कहा कि ईश्वर स्मृति, पवित्रता और निःस्वार्थ सेवा—यही वे आधार स्तंभ हैं, जिन पर स्थायी शांति और सच्ची खुशी का जीवन निर्मित होता है। उन्होंने बताया कि पिताश्री ने शिवबाबा के साकार माध्यम के रूप में आत्मिक जागरण का जो संदेश दिया, वह आज विश्वभर में
शांति और सकारात्मक चेतना का प्रकाश फैला रहा है। ‘याद की यात्रा’ को आत्मा की शक्ति बताते हुए उन्होंने साधकों से इसे जीवन का नियमित अभ्यास बनाने का आह्वान किया।समारोह में जिले की सभी तहसीलों के दस केंद्रों से एक हजार से अधिक भाई-बहनों ने सहभागिता की। तपस्या, साधना और सेवा में निरंतर सक्रिय साधकों को ब्रह्मकुमारी ज्योति दीदी द्वारा सम्मानित किया गया। कुलदीप सिंह, खुशी राम, संतोष बहन, रश्मि, किरन, सोनिया, मालती सहित अनेक भाई-बहनों की उपस्थिति रही। विजय जीत, बबली, मालती और शालिनी के समर्पण भाव की विशेष सराहना की गई। इस अवसर पर मातृभूमि सेवा
मिशन, रायबरेली इकाई के संरक्षक समाजसेवी महेंद्र अग्रवाल, इकाई अध्यक्ष रामराज गिरी तथा मंडल अध्यक्ष बीपी सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत ज्ञानवर्धक साहित्य भेंट कर किया गया।लालगंज, महाराजगंज, ऊंचाहार, बछरावां, डलमऊ, सलोन और हरचंदपुर केंद्रों से आई जान्हवी, आरती, सीमा, अंजू, सरिता, शालिनी, जागृति, रूपाली और शिखा बहन सहित अनेक साधिकाओं तथा तुषार, राजबहादुर और ददन भाई की सहभागिता उल्लेखनीय रही।कार्यक्रम का समापन गहन शांति, आत्मिक ऊर्जा और सेवा-संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित साधकों ने ईश्वर स्मृति, पवित्रता और निःस्वार्थ सेवा को जीवन में स्थायी रूप से अपनाने का दृढ़ संकल्प लिया।
✍️पत्रकार रितिक तिवारी की रिपोर्ट ✍️



