✍️प्रशासनिक संवेदनशीलता तार-तार: सड़क किनारे 15 घंटे से तड़प रहा था बेजुबान, अधिकारी रहे बेखबर✍️
‼️बजरंग दल के प्रखंड सहसंयोजक शैलेश कुमार पटेल ने कराया इलाज, बेहीखोर गौशाला पहुँचाया‼️
✍️प्रशासनिक संवेदनशीलता तार-तार: सड़क किनारे 15 घंटे से तड़प रहा था बेजुबान, अधिकारी रहे बेखबर✍️
‼️बजरंग दल के प्रखंड सहसंयोजक शैलेश कुमार पटेल ने कराया इलाज, बेहीखोर गौशाला पहुँचाया‼️
जगतपुर (रायबरेली)
उत्तर प्रदेश सरकार भले ही गोवंश संरक्षण और पशु क्रूरता के खिलाफ सख्त निर्देश जारी कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही बेजुबानों की जान पर भारी पड़ रही है। ताजा मामला जगतपुर के लखनऊ-प्रयागराज मार्ग स्थित मदरसा मोड़ का है, जहाँ एक आवारा पशु पिछले 15 घंटों से जिंदगी और मौत के बीच तड़पता रहा, लेकिन प्रशासन के कान पर जूँ तक नहीं रेंगी। ऐसे में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सक्रियता दिखाते हुए न सिर्फ बेजुबान का इलाज कराया, बल्कि उसे सुरक्षित आश्रय भी दिलाया।
सूचना के बाद भी अधिकारियों ने साधी चुप्पी
स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों के अनुसार, पशु गंभीर रूप से घायल और बीमार स्थिति में सड़क किनारे असहाय पड़ा था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए ग्रामीणों ने तत्काल खंड विकास अधिकारी (BDO) और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) को मोबाइल के माध्यम से सूचना दी। हैरानी की बात यह है कि सूचना मिलने के कई घंटों बाद भी कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या पशु चिकित्सा टीम मौके पर नहीं पहुँची। अधिकारियों की यह “कुंभकर्णी नींद” शासन की मंशा और प्रशासनिक सक्रियता पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।
बजरंग दल और ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
प्रशासनिक उपेक्षा के बीच बजरंग दल के प्रखंड सहसंयोजक शैलेश कुमार पटेल को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, वे तुरंत सहयोगियों के साथ मौके पर पहुँचे। उन्होंने घायल पशु के लिए प्राथमिक चिकित्सा और इलाज की व्यवस्था कराई। इसके बाद कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की मदद से तत्परता दिखाते हुए बेजुबान को गाड़ी पर लादकर सुरक्षित ‘बेहीखोर गौशाला’ पहुँचाया गया।इस सेवा कार्य के दौरान मौके पर मुख्य रूप से जगतपुर ग्राम प्रधान रमाकांत यादव, प्रशांत, गोलू यादव, हिमांशु, विमल, दद्दू, मिथुन आदि लोग मौजूद रहे और सभी ने इस मानवीय कार्य की सराहना की।
रिपोर्ट: रितिक तिवारी



