✍️जगतपुर के खालेहार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन प्रख्यात कथावाचक गणेश शंकर शास्त्री ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और उनके दिव्य महात्म्य का मर्मस्पर्शी वर्णन किया✍️

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✍️जगतपुर के खालेहार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन प्रख्यात कथावाचक गणेश शंकर शास्त्री ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और उनके दिव्य महात्म्य का मर्मस्पर्शी वर्णन किया✍️
‼️जगतपुर रायबरेली ‼️
✍️श्रोताओं को भक्ति रस में सराबोर करते हुए शास्त्री जी ने कई महत्वपूर्ण प्रसंगों पर प्रकाश डाला:
कथा के मुख्य अंश
बाल लीलाओं का वर्णन: शास्त्री जी ने बताया कि भगवान कृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भक्तों को आनंद प्रदान करने और अधर्म का नाश करने का माध्यम थीं।
गोवर्धन पूजा का महत्व: उन्होंने विस्तार से समझाया कि कैसे भगवान ने इंद्र का मान-मर्दन कर गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया। यह प्रसंग हमें प्रकृति की पूजा और अहंकार के त्याग की शिक्षा देता है।
माखन चोरी का आध्यात्मिक अर्थ: “माखन चोरी” को उन्होंने जीवात्मा और परमात्मा के मिलन के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि भगवान भक्तों के हृदय रूपी मक्खन को चुरा लेते हैं।
शास्त्री जी द्वारा बताए गए ‘महात्म्य’ (सार)
शास्त्री जी ने कथा के दौरान जीवन की सार्थकता पर जोर देते हुए कुछ विशेष बातें कहीं:
“श्रीमद्भागवत केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि साक्षात कृष्ण का स्वरूप है। जो मनुष्य इस कथा को श्रद्धापूर्वक सुनता है, उसके जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। वही कथा समाप्त होने पर टाघन ग्राम प्रधान इंद्र जीत पांडे,ज्ञानेंद्र तिवारी,सर्वेश त्रिवेदी,धीरज के द्वारा प्रसाद वितरण किया गया वही इस अवसर पर कथा आयोजक महेश तिवारी, राकेश तिवारी, धर्मेंद्र कुमार तिवारी, धीरेन्द्र तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे✍️
✍️पत्रकार रितिक तिवारी की रिपोर्ट ✍️



