✍️भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा ‘दिव्यांग शौचालय’: न रैंप, न पानी; एक साल बाद भी प्रयोग के लायक नहीं✍️

✍️भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा ‘दिव्यांग शौचालय’: न रैंप, न पानी; एक साल बाद भी प्रयोग के लायक नहीं✍️
‼️जगतपुर रायबरेली ‼️
✍️सरकार जहाँ एक ओर ‘सुगम्य भारत’ और दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जगतपुर विकास क्षेत्र के रोझइया गोकुलपुर स्थित ‘प्राथमिक विद्यालय पूरे झाम सिंह’ में बना दिव्यांग शौचालय सरकारी दावों की पोल खोल रहा है। करीब एक वर्ष पूर्व बना यह शौचालय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है और अब यह स्वयं ‘दिव्यांग’ बनकर रह गया है।
📍कागजों में हुआ निर्माण, धरातल पर नदारद सुविधाएँ📍
प्राथमिक विद्यालय परिसर में दिव्यांग बच्चों की सुविधा के लिए इस शौचालय का निर्माण कराया गया था। परंतु, निर्माण के पूरे एक वर्ष बीत जाने के बाद भी यह शौचालय किसी भी दृष्टि से प्रयोग के लायक नहीं बन सका है। शौचालय के प्रवेश द्वार पर रैंप का न होना, दिव्यांगजनों के लिए सबसे बड़ी बाधा है। इसके अलावा, पानी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण यह शौचालय बदहाली का शिकार है।
📍ग्राम पंचायत प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल📍
✍️ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन का सीधा आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और ग्राम प्रधान की मिलीभगत से निर्माण कार्य में मानकों की जमकर अनदेखी की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में केवल सरकारी धन का बंदरबांट हुआ है, जबकि धरातल पर कोई भी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। निर्माण की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक साल के भीतर ही यह सुविधा पूरी तरह निष्प्रभावी हो गई है।
📍शासन की मंशा पर पानी फेर रहे जिम्मेदार📍
विद्यालय में पढ़ने वाले दिव्यांग बच्चों को शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी भटकना पड़ रहा है। सरकारी धन का उपयोग जनकल्याण के बजाय भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता और भ्रष्टाचार के कारण शासन की जनकल्याणकारी योजनाएँ कागजों में ही सिमट कर रह गई हैं।
📍ग्रामीणों की मांग: उच्च स्तरीय जाँच हो📍
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खंड विकास अधिकारी से इस मामले की तत्काल उच्च स्तरीय जाँच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जाँच की जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए, तभी सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लग सकेगी और बच्चों को उनका हक मिल पाएगा।✍️



