✍️धूता गौशाला की बदहाली और भ्रष्टाचार का ‘वायरल’ सच: फोटो-वीडियो लेने से रोकने के ऑडियो ने खड़ी की सवालों की लंबी कतार✍️

✍️धूता गौशाला की बदहाली और भ्रष्टाचार का ‘वायरल’ सच: फोटो-वीडियो लेने से रोकने के ऑडियो ने खड़ी की सवालों की लंबी कतार✍️
‼️जगतपुर/रायबरेली ‼️
‼️रिपोर्ट रितिक तिवारी ‼️

✍️जगतपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत धूता में गौशाला का संचालन इन दिनों चर्चा के साथ-साथ सवालों के घेरे में आ गया है। गौशाला की दयनीय स्थिति और उसमें हो रहे कथित भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए ग्राम प्रधान द्वारा कथित तौर पर फोटो-वीडियो न बनाने का दबाव बनाने वाला एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
📍’गोपनीयता’ के पीछे क्या है मंशा?📍
वायरल हो रहे ऑडियो में ग्राम प्रधान का लहजा स्पष्ट रूप से बचाव का है। वे फोन पर किसी व्यक्ति को गौशाला के भीतर जाकर फोटो और वीडियो बनाने से सख्ती से मना करते हुए सुनाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि गौशाला में व्यवस्थाएं सुदृढ़ हैं और सरकारी बजट का सही उपयोग हो रहा है, तो फिर प्रधान को गौशाला के दृश्य सार्वजनिक होने का डर क्यों है? इस ऑडियो ने भ्रष्टाचार की आशंकाओं को और बल दिया है।
📍गौशाला: सुविधाओं का अभाव और बदहाली का मंजर📍
स्थानीय ग्रामीणों और पशु प्रेमियों द्वारा धूता गौशाला की जो स्थिति बताई जा रही है, वह बेहद चिंताजनक है:
- अव्यवस्था का आलम: गौवंशों के लिए चारे और स्वच्छ पानी की घोर किल्लत है।
- सफाई का नामोनिशान नहीं: गौवंशों के रहने के स्थान पर गंदगी और कीचड़ का अंबार लगा है, जिससे उनके बीमार होने का खतरा बना हुआ है।
- सुरक्षा में सेंध: गौशाला की टीन शेड और बाउंड्री वॉल जर्जर हो चुकी है, जिससे बेसहारा पशुओं की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
बजट के बंदरबांट का आरोप
ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका साफ कहना है कि गौशाला के नाम पर आने वाला सरकारी बजट कागजों में तो खर्च दिखाया जा रहा है, लेकिन धरातल पर कहीं नजर नहीं आता। प्रधान की ओर से की जा रही ‘फोटोबंदी’ की कोशिश इसी भ्रष्टाचार को छुपाने का एक तरीका माना जा रहा है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
इस मामले ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। स्थानीय लोगों और पशु प्रेमियों ने अब जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस वायरल ऑडियो की सत्यता की जांच की जाए और धूता गौशाला की जमीनी हकीकत का भौतिक सत्यापन कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गौशाला के संचालन में अनियमितता पाई जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और ग्राम प्रधान पर कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।



