✍️प्रशासन की नाक के नीचे रात के अंधेरे में मिट्टी का ‘काला खेल’,जगतपुर के भीख गांव में धड़ल्ले से किया गया अवैध खनन, राजस्व और पुलिस विभाग मौन✍️

✍️प्रशासन की नाक के नीचे रात के अंधेरे में मिट्टी का ‘काला खेल’✍️
‼️जगतपुर: भीख गांव में धड़ल्ले से किया गया अवैध खनन, राजस्व और पुलिस विभाग मौन‼️
📍जगतपुर, रायबरेली। (रिपोर्ट: रितिक तिवारी)📍
✍️उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के सख्त निर्देशों के बावजूद रायबरेली के जगतपुर थाना क्षेत्र में अवैध खनन का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला जगतपुर थाना क्षेत्र के भीख गांव का है, कल रात दिन गुरुवार को जहाँ रात ढलते ही खनन माफिया सक्रिय हो जाते हैं और सुबह होने तक धरती का सीना चीरकर चांदी काटते हैं।
📍मिलीभगत के आरोप📍
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि भीख गांव में रात के अंधेरे में हो रहा यह अवैध खनन बिना स्थानीय पुलिस और राजस्व विभाग की ‘मूक सहमति’ के संभव नहीं है। चर्चा है कि विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से माफिया बेखौफ होकर ट्रैक्टर-ट्रॉली चला रहे हैं। रात भर होने वाले शोर और धूल से ग्रामीण परेशान हैं, लेकिन माफियाओं के रसूख के आगे कोई बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
📍अंधेरे का फायदा उठा रहे माफिया📍
सूत्रों की मानें तो खनन माफिया ने पकड़े जाने के डर से काम का समय रात को चुन रखा है। दिन भर सन्नाटा रहता है, लेकिन सूरज ढलते ही खनन वाली जगहों पर मशीनों की गड़गड़ाहट शुरू हो जाती है। ताज्जुब की बात यह है कि गश्त का दावा करने वाली पुलिस को इन भारी वाहनों की आवाजाही की भनक तक नहीं लगती।
📍राजस्व को लग रहा चूना📍
बिना किसी वैध परमिट और रॉयल्टी के किए जा रहे इस अवैध खनन से शासन को लाखों रुपये के राजस्व की चपत लग रही है। अब देखना यह है कि खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन और खनन विभाग इस पर क्या कार्रवाई करता है या फिर माफियाओं का यह ‘पीला खेल’ इसी तरह अनवरत जारी रहेगा।
प्रमुख बिंदु (Highlights for Sidebox):
स्थान: भीख गांव, थाना जगतपुर, रायबरेली।
समय: रात के अंधेरे में होता है अवैध संचालन।
शिकायत: पुलिस और राजस्व विभाग पर उठ रहे मिलीभगत के सवाल।
असर: सरकार को राजस्व की हानि और सड़कों की बदहाली।



