✍️औचक निरीक्षण के बाद विवाद: मौजूद कर्मचारियों को अनुपस्थित दर्शाने का आरोप, वेतन रुका✍️

✍️औचक निरीक्षण के बाद विवाद: मौजूद कर्मचारियों को अनुपस्थित दर्शाने का आरोप, वेतन रुका✍️
👉जगतपुर (रायबरेली)👈
✍️रायबरेली जिले की ऊंचाहार तहसील के विकासखंड जगतपुर में बीती 12 जून को जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका के निर्देश पर हुए एक औचक निरीक्षण के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। निरीक्षण के दौरान मौजूद रहने का दावा करने वाले कई कर्मचारियों को उपस्थिति रजिस्टर में अनुपस्थित दर्शा दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप न केवल उनका एक दिन का वेतन रोक दिया गया है, बल्कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। तहसीलदार की इस कार्रवाई से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है और जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
तस्वीरें और हस्ताक्षर होने का दावा
मामले में पीड़ित सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) अनिल कुमार वर्मा और वरिष्ठ सहायक/उर्दू अनुवादक जफर अब्बास जैदी ने पुरजोर दावा किया है कि वे निरीक्षण के समय मौके पर ही मौजूद थे। उन्होंने न केवल रजिस्टर पर अपने हस्ताक्षर किए थे, बल्कि साक्ष्य के तौर पर तहसीलदार के साथ अपनी एक तस्वीर भी साझा की है, जिसमें वे स्पष्ट रूप से खड़े नजर आ रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें अनुपस्थित दर्ज कर दिया गया।
स्थानांतरित और दोहरे प्रभार वाले कर्मचारियों पर भी गाज
विवाद यहीं नहीं थमता; बोरिंग टेक्नीशियन श्रीमती रचना, जिनका स्थानांतरण पहले ही दीन शाह गौरा हो चुका है, उन्हें भी इस निरीक्षण में अनुपस्थित चिन्हित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, कई ऐसे कर्मचारी जो दो अलग-अलग विकास खंडों का प्रभार संभाल रहे हैं, उन्हें भी ड्यूटी पर होने के बावजूद अनुपस्थित दर्शाकर उनका वेतन बाधित कर दिया गया है।
कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरी एकतरफा कार्रवाई से रुष्ट कर्मचारियों का कहना है कि जब वे मौके पर तैनात थे और उनके पास उपस्थित होने के पुख्ता प्रमाण (तस्वीरें व हस्ताक्षर) मौजूद हैं, तो किस आधार पर उन्हें अनुपस्थित दिखाकर दंडित किया जा रहा है? मौके पर मौजूद होने के बावजूद कर्मचारियों का वेतन रोकने और उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के इस रवैये ने प्रशासनिक जांच की पारदर्शिता को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। कर्मचारी अब इस मामले में उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
✍️ रिपोर्ट रितिक तिवारी ✍️



